1-श्री गजानन महाराज की जय (हैहयवंशी)
ll त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव ll
ll त्वमेव विद्या द्रविडं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देवदेव ll
ll त्वमेव विद्या द्रविडं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देवदेव ll
हैहयवंशी सनातनी ब्लॉग पर आप सभी मित्रो, भाइयो, बहनों, बच्चो और बड़े-बूढों तथा सम्माननीय गणों का हार्दिक स्वागत है. ब्लॉग पढने के उपरांत अपनी प्रतिक्रिया देना न भूले।
हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वाश है कि, आप इसमे प्रस्तुत किये गए धार्मिक एवं पुरानी कहानियो के आधार पर उल्लिखित वर्णनों से सहमत होगें. ... इसमे कुछ त्रुटियाँ भी हो सकती है, परन्तु इसकी सार्थकता व प्रमाणिकता का भरपूर ख्याल एवं ध्यान दिया गया है.
We hope not only have full faith that you presented in this story based on religious and old will agree with the details mentioned. ... It may be some errors, but its significance and authenticity care and attention has been paid in full.
अनुवाद के नतीजे
अनुवाद
प्रदीप कुमार वर्मा पुत्र स्व बद्री प्रसाद ताम्रकार)
शमसाबाद, कौशाम्बी (उत्तर प्रदेश)

टिप्पणियाँ