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17 - महापराक्रमी -ताम्रध्वज (हैहयवंशी) tamrakaar jati kee utpatti

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महापराक्रमी -ताम्रध्वज (हैहयवंशी) काली महाकाली कालिके परमेश्वरी । सर्वानन्दकरी देवी नारायणि नमोऽस्तुते ।। रतनपुर नरेश ताम्रध्वज अपने पिता के सामान धर्मज्ञ और शूर वीर थे। इन्होने अपने बाहुबल से पूर्व में कलिंग देश तक अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया था। श्री युत योगेन्द्र नाथ शील द्वारा लिखित मध्य प्रदेश और बरार का इतिहास के पृष्ठ 87 में लिखा है कुल लिंगेश्वर का मंदर जो विशेष वर्णन के योग्य है। यह मंदिर एक द्वीप पर स्थित है, किसी समय पैरी और महानदी के सगम के बीच भूमि के एक नोक निकल आई थी वही अब टापू बन गई है, यह मंदिर बाहर से 14.5 वर्ग फुट का है, इसमें राजीव लोचना समूह के प्राचीन मंदिरों  के सरश एक मंडप बना है इसका आगे का भाग खुला हुआ है और बगल का भाग बंद है, अनुमान किया जाता है की कुल लिंगेश्वर के मंदिर को महाराज ताम्रध्वज ने बवाया था। महानदी के नदी तट पर जो शिरी नरायण नामक नगर है, उसका रूपांतरण नारायण क्षेत्र के नाम से इन्ही के स्वर किया गया था। इनका विस्तृत वर्णन रतनपुर के राज्य दीवान कविवर श्री रेमराम जी द्वारा रचित " रतनपुर का इतिहास" नामक ग्रन्थ में उपलब्...