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21 - रतनपुर के नरेश व अन्य शिलालेख और 36 गढ़

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21 - रतनपुर के  व अन्य  शिलालेख और 36 गढ़  Other shilalekh of Ratanpura and Chhattisgadh  एविग्राफिका इंडिका खंड 1 पेज 45 के अनुसार यह लेख् नागपुर संग्रहालय में है. यह पृथ्वीदेव III के बारे में लिखा गया है। इसमें वि0स0 1247 (की 1989-90) अंकित है। जाजल्लदेव के पुत्र रतनदेव जिन्होंने चुड़ और गंग वीरो को हराया था, के पुत्र पृथ्वीदेव थे। इस लेख के रचयिता देव गंग थे। यह लेख साम्बा ग्राम शिवमंदिर के निर्माण के अवसर पर लगाया गया था। पृथ्वीदेव III के समय विक्रम संवत 1248 में दिल्ली के सुप्रसिद्ध नरेश पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गोरी का युद्ध हुआ था, जिसका वर्णन इतिहास में दर्ज है। ऐतिहासिक विद्वानों के मतानुसार उस समय मध्य और दक्षिण भारत के करीब 150 राजागण चौहान की सहायतार्थ दिल्ली गए थे। अध्ययन से पता चलता है राठौर और चंदेल चौहान के विपरीत, हैहय और खेतसिंह खंगार आदि राजा इनके पक्ष में थे।         रतनपुर के हैहय वंशी राजाओ में पृथ्वीदेव I से पृथ्वीदेव III तक विक्रम संवत की 10वी सदी से 12वी सदी की अर्धाली तक अधिक प्रभावशाली राजा महाराजा रहे इनके ही द्...

20 - प्राचीन शिलालेखो के आधार Based on ancient inscriptions

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पेज 20-------------- कुगदा का टूटा-फूटा लेख  इंडियन एंटीक्वेरी जिल्द 20 के पेज 84 और कनिगहम की आर्कोलोजिकल\रिपोर्ट जिल्द 7 के पेज 211 के अनुसार प्रथ्वी देव द्वित्तीय का शासन काल कलचुरी संवत 893 अंकित है (जो कि विक्रम संवत 1199 होता है) लेख के अनुसार कलचुरी लाछल देवी, रतनदेव और बल्लभ्राज शब्द आये है, अतिम दोनों नाम रतनपुर नरेशों के है। इन दोनों शिलालेखो से पृथ्वी देव द्वित्तीय का शासन काल 1199 से 1222 तक रहा है।                महमदपुर, अकलतारा और कुग्दा के लेखो में बल्लभ राज का नाम भी आया है, परन्तु आपके सम्बन्ध में निश्चित नहीं कहा जा सकता है की आपका सम्बन्ध किस राजघराने से था।  Kugda 's broken - erupted articles Indian entikveri kanigham archaeological of bookbinding 20 page 84 and interlace 7 page report according to 211 \0 prathvi dev II sanvat kalchuri period ruled 892 face (which is sanvat Vikram 1199 ) according to articles ratnadev and ballabhraj Word kalchuri lachal g...