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प्रातः स्मरणीय व कल्याणकारी छः मन्त्र!

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चक्रवर्ती सम्राट सहस्त्रार्जुन   "*******हैहयवंश*****"  प्रातः स्मरणीय व कल्याणकारी छः मन्त्र! भारतीय संस्कृति एक महान संस्कृति है, इसमें न केवल जन्म से मृत्यु तक बल्कि दिन के प्रारम्भ से लेकर अंत तक की भी, महत्वपूर्ण एवं सुन्दर प्रार्थनाओं का समावेश किया गया है। मैं इनमें से दिन के प्रारम्भ की प्रार्थनों को आपके सम्मुख लेकर आया हूं, इस आशा के साथ कि ये प्रार्थनाएं निश्चित ही आपकी शारीरिक-मानसिक-धार्मिक उन्नति में सहायक होगी। प्रातःकाल उठतेे ही अपने दोनों हाथों को आपस में रगड़े तत्पश्चात अपने हाथों का दर्शन करते हुए, निम्न श्लोक को दोहरायें- काराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्।।1।। हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी, मध्य भाग में सरस्वती तथा हाथ के मूल भाग में भगवान नारायण निवास करते हैं। अतः प्रातःकाल अपने हाथों का दर्शन करते हुए अपने दिन को शुभ बनायें। बिस्तर छोड़ने के बाद धरती पर पैर रखने से पहले निम्न श्लोक को दोहराये- समुन्द्रवसने   देवि!       पर्वतस्तनमण्डले । विष्ण...

जियो और जीवन दो

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हैहयवंशी ब्लॉग चिड़िया जब जीवित रहती है तब वो चिंटी को खाती है चिड़िया जब मर जाती है तब चींटिया उसको खा जाती है। इसलिए इस बात का ध्यान रखो की समय और स्तिथि कभी भी बदल सकते है इसलिए कभी किसी का अपमान मत करो कभी किसी को कम मत आंको। तुम शक्तिशाली हो सकते हो पर समय तुमसे भी शक्तिशाली है। एक पेड़ से लाखो माचिस की तीलिया बनाई जा सकती है पर एक माचिस की तिल्ली से लाखो पेड़ भी जल सकते है। कोई चाहे कितना भी महान क्यों ना हो जाए, पर कुदरत कभी भी किसी को महान बनने का मौका नहीं देती। *कंठ दिया कोयल को, तो रूप छीन लिया । *रूप दिया मोर को, तो ईच्छा छीन ली । *दी ईच्छा इन्सान को, तो संतोष छीन लिया । *दिया संतोष संत को, तो संसार छीन लिया । *दिया संसार चलाने देवी-देवताओं को, तो उनसे भी मोक्ष छीन लिया । *मत करना कभी भी ग़ुरूर अपने आप पर 'ऐ इंसान' भगवान ने तेरे और मेरे जैसे कितनो को मिट्टी से बना के, मिट्टी में मिला दिए .. यह  कैसा  तेरा  प्यार  है  ज़ालिम दिल  न  रहा  सरकारी  दफ्तर  बन  गया  है न  कोई  काम ...

44_जय वाइफ देवा

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"chakravartee samrat shree shree sahastranjun  " **********haihay vansh********* ## @@@@ बीवी देवी की आरती @@@@ ************************* जय बीवी , जय पत्नी , जय वाइफ देवा | माता थांरी महा देवी , और पिता परम देवा || जेवर चढ़े , चुनर चढ़े और चढ़े मेवा | मिठाई का भोग लगे और पति करे सेवा || जय बीवी , जय पत्नी , जय वाइफ देवा | माता थांरी महादेवी , और पिता परम देवा || हुक्म करो , ऑर्डर करो , दुःख - कष्ट देवा | उतारूं थांरी आरती , और करूँ थांरी सेवा || जय बीवी , जय पत्नी , जय वाइफ देवा | माता थांरी महादेवी , और पिता परम देवा || भारी तन , गज बदन , एक चोटी धारी | मँहगी पड़ती प्लेन से भी , आप की सवारी || जय बीवी , जय पत्नी , जय वाइफ देवा | माता थांरी महादेवी , और पिता परम देवा || डांट खाते , झिड़की खाते , फिर भी करते सेवा | कुछ दे दो देवी हमको , इस सेवा का मेवा || जय बीवी , जय पत्नी , जय वाइफ देवा | माता थांरी महादेवी , और पिता...