16 - वीर शिरोमणि महाराजा मयूरध्वज
वीर शिरोमणि महाराजा मयूरध्वज भक्त सुधन्वा में कथानक से भी अधिक मार्मिक एवं करूँ प्रसंग हैहयवंशी मणिपुर नरेश मयूरध्वज का मिलता है। मणिपुर को वर्तमान में रतनपुर कहते है जो मध्य प्रदेश के विलाश्पुर जिले में अवस्थित है। घटना क्रम का आरंभ महाराज युधिस्ठिर द्वारा कृत अश्वमेघ यज्ञ से होता है अर्थात दिग्विजय के लिए छोड़ा गया श्रृंगारित अश्व मयुर्द्वाज की राज्य सीमा में प्रवेश करता है। संयोग की बात है की उस समय मणिपुर नरेश मयूरध्वज भी अश्वमेघ यज्ञ की तैयारी पूरी कर चुके थे और वे अपने श्रृंगारित अश्व को स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ चुके थे। इस अश्व के रक्षक एवं सेनापति मयूरध्वज के पुत्र वीर ताम्रध्वज थे। ताम्रध्वज ने पांडवो के आये हुए अश्व को पकड़ लिया, तदुपरांत दोनों दलों में घनघोर युद्ध छिड़ गया युद्ध में ताम्रध्वज ने अर्जुन एवं भगवान् श्री कृष्ण दोनों को मूर्छित कर दिया, एवं दोनों अश्वो को लेकर अपने पिटा जी के पास पहुचे। ताम्रध्वज ने सोचा तो यह था की हमारे इस वीरता पूर्ण कार्य से जनक श्री अति प्रसन्न होगे। किन्तु हुआ इसके विपरीत। बंक भाकुती करके महाराजा मोरध्वज क्रोध पूर्ण स्वर में...