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सितंबर 9, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

37 My dear love

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"चक्रवर्ती सम्राट श्री श्री सहस्रार्जुन"   **********हैहय वंश********* My dear love, I wanted to share My thoughts, my feelings and What makes me despair I want to share with you What makes me happy; what makes me feel blue.. So you can sense that my love .........  (PraDeep Singh Haihayvanshi)

36 मुस्लिम की असलियत

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                         "चक्रवर्ती सम्राट श्री श्री सहस्त्रबाहु अर्जुन  "                             **********haihay vansh********* मुस्लिम की असलियत प्राचीनतम इतिहास … श्री राम के द्वारा मुस्लिम की असलियत                              मै काफी दिन से इस्लाम को समझने की कोशिस कर रहा था … की आखिर ये क्या है …ये कोई धर्म है या मत या कोई …. कुछ और ? लेकिन एक बात मुझे ज्यादा परेशन करती थी इनका हर काम हिन्दू धर्म के विपरीत करने का …. मुझे हमेशा से जिज्ञासा बनी रहती थी … इसको जानने की … और इसको जानने के लिए कभी किसी का लेख तो कभी इस्लाम की धार्मिक पुस्तकों को पढता था ..लेकिन कभी सही उत्तर नहीं मिला …. कोई कुछ कहता तो कोई कुछ हर एक के अपने अलग विचार ..हा कुछ बाते जरुर सामान होती थी ..यदि मै किसी मुस्लिम दोस्त से पूछता तो .. इस्लाम को पुरा...

36 घाघ व भड्डरी की ‘‘कृषि व मौसम संबंधी कहावतें’’!!

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"chakravartee samrat shree shree sahastranjun "  **********haihay vansh********* घाघ व भड्डरी की ‘‘कृषि व मौसम संबंधी कहावतें’’!! घाघ और भड्डरी में अवश्य ही में कोई दैवीय प्रतिभा थी। क्योंकि उनकी जितनी कहावतें हैं, प्रायः सभी अक्षरशः सत्य उतरती हैं। गांवों में तो इनकी कहावतें किसानों को कंठस्थ हैं। इनकी  कहावतों के अनेक संग्रह मिलते हैं. परन्तु इनमें पाठांतरों की भरमार है। इसी कारण इनकी बहुत-सी कहावतों के फल ठीक नहीं उतरते। इसलिए मैंने इनकी  अत्यधिक प्रचलित, कृषि व मौसम संबंधी कहावतों को ही अपने इस ब्लॉग में सम्मिलित किया है। साथ ही कुछ कहावतों को मैंने वर्तमान परिपेक्ष्य में उदाहरण सहित प्रस्तुत किया है, ताकि पाठक कहावतों के सही अर्थ को ह्रदयंगम कर सकें। चैते वर्षा आई और सावन सूखा जाई। एक बूंद जो चैत में परे सहसबूंद सावन की हरै। घाघ! कहते हैं यदि चैत के महीने में वर्षा होगी तो सावन के महीने में कम वर्षा होगी। यदि एक बूंद भी वर्षा की पड़ती है, तो वह सावन की हजार बूंदों को समाप्त कर देती है। पाठकजनों! आपको याद होगा इस बार चैत्र (मार्च-अप...