"chakravartee samrat shree shree sahastranjun " **********haihay vansh********* घाघ व भड्डरी की ‘‘कृषि व मौसम संबंधी कहावतें’’!! घाघ और भड्डरी में अवश्य ही में कोई दैवीय प्रतिभा थी। क्योंकि उनकी जितनी कहावतें हैं, प्रायः सभी अक्षरशः सत्य उतरती हैं। गांवों में तो इनकी कहावतें किसानों को कंठस्थ हैं। इनकी कहावतों के अनेक संग्रह मिलते हैं. परन्तु इनमें पाठांतरों की भरमार है। इसी कारण इनकी बहुत-सी कहावतों के फल ठीक नहीं उतरते। इसलिए मैंने इनकी अत्यधिक प्रचलित, कृषि व मौसम संबंधी कहावतों को ही अपने इस ब्लॉग में सम्मिलित किया है। साथ ही कुछ कहावतों को मैंने वर्तमान परिपेक्ष्य में उदाहरण सहित प्रस्तुत किया है, ताकि पाठक कहावतों के सही अर्थ को ह्रदयंगम कर सकें। चैते वर्षा आई और सावन सूखा जाई। एक बूंद जो चैत में परे सहसबूंद सावन की हरै। घाघ! कहते हैं यदि चैत के महीने में वर्षा होगी तो सावन के महीने में कम वर्षा होगी। यदि एक बूंद भी वर्षा की पड़ती है, तो वह सावन की हजार बूंदों को समाप्त कर देती है। पाठकजनों! आपको याद होगा इस बार चैत्र (मार्च-अप...