40_कुछ गंवाया है तो काफी कुछ पाया है
" चक्रवर्ती सम्राट श्री श्री सहस्त्रबाहु अर्जुन " ********** हैहयवंश ********* जिसने भी मोहब्बत का गीत गाया है,जिंदगी का उसने ही लुत्फ़ उठाया है गर्मी हो चाहे हो सर्दी का मौसम अजी,प्रेमियों ने सदा ही जश्न मनाया है हर खेल में वो ही तो अब्बल आया है,जिस किसी ने भी दमख़म दिखाया है वो माने चाहे न माने है उसकी मर्जी,हमने तो सब कुछ ही उसपे लुटाया है कौन समझ पाया है इस दुनिया को,प्रेमियों पे सदा ही इसने जुल्म ढाया है … आदमी सीख न पाया मिल के रहना,चाहे हर पीर पैगम्बर ने समझाया है सच्चों को पहले तो सूली पे चढाया है,बाद में चाहे ये समाज पछताया है मंजिल पे देर सवेर पहुंच ही जायेगा,जिस किसी ने पहला कदम उठाया है इश्क में यहां हर किसी ने ही प्यारे, कुछ गंवाया है तो काफी कुछ पाया है हमारे बिन अधूरे तुम रहोगे, कभी चाहा था किसी ने,तुम ये खुद कहोगे, न होगे हम तो किसी ने ,तुम ये खुद कहोगे, मिलेगे बहुत से लेकिन कोई हम सा पागल ना होगा. हम वो नहीं जो दिल तोड़ देंगे, थाम कर हाथ साथ छोड़ देंगे, हम दोस्ती करते हैं पानी और ...