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15 - चंद्रपुर नरेश हंश्ध्वज एवं वीर सुधन्वा

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चंद्रपुर नरेश हंश्ध्वज एवं वीर सुधन्वा  (Chandra Naresh Hanshdhwaj and Veer Sudhanva)       श्री हंश्ध्वज वही प्रसिद्ध पुरुष  है जिनके वीर  सुधन्वा   का कथानक महाभारत में वर्णित है। महाराज हंश्ध्वज  के राज्य में प्रजा सात्विक वृत्ति से जीवन यापन करती थी। यही नहीं राज्य कुल के सभी सदस्य एवं प्रजा एक  पत्नी व्रतधारी थे। पर स्त्री रमण करने वाले व्यक्ति को राज्य में रहने का अधिकार नहीं था। इनके पञ्च पुत्र एवं एक पुत्री थी। सुबल, शुरथ , संसम, सुदर्शन और सुधन्वा  tatha पुत्री का नाम कुवला  था।              हस्तिनापुर नरेश युधिस्ठिर के अश्वमेघ यज्ञ  का अश्व   हंश्ध्वज  की राज्य सीमा में आया।   हंश्ध्वज के कनिष्ठ पुत्र सुधन्वा ने उक्त अश्व को पकड़ लिया एवं अपने पिता को यह समाचार दिया। समाचार पाकर   हंश्ध्वज प्रसन्न हुए की युद्ध के साथ साथ रण में अर्जुन के सखा भगवान् श्री कृष्ण के दर्शन कर सकूंगा। इस कारण युद्ध की घोषणा कर दी और राज्य में संख और लिखित ...

14 - कांस्यकार शाखा का उदय

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      महाराजा सहस्त्रबाहु की उत्तर कालीन सन्तति  एवं                              कांस्यकार शाखा का उदय   Emperor of the North Carpet progeny and Shstrbahu                         Rise of Kansykar branch                 श्री मदभागवत  पुराण के मतानुसार युद्ध में जो क्षत्रिय परशुराम जी से भयभीत होकर बिभिन्न  पर्वत श्रेणियों में छिप गए थे उन समस्त क्षत्रियों को कश्यप मुनि  के द्वारा सादर आमंत्रित किया  गया, क्युकी शासन  सूत्र सम्हालना  ब्राम्हणों के वश की बात नहीं थी। श्री परशुराम जी द्वारा विजित एवं  प्रदत्त  राज्य कश्यप मुनि ने क्षत्रिय कुलों में  बिभक्त कर दिए गए। सहस्त्रबाहु के वंसज जयध्वज को भी उनका राज्य उन्हें पुनः वापस कर दिया गया। जयध्वज ने अपनी राजधानी वार...