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11 - हैहय जन्म एवं उनका चरित्र

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हैहय जन्म एवं उनका चरित्र  श्री श्री 108 परम पूज्यनीय गुरूजी द्वारा कुछ सामग्री प्राप्त हुयी।  आप पुराणों के प्रवचन में अत्यंत दक्ष थे।  ज्योतिष के भी प्रकांड विद्वान् थे।  आपको विविध ग्रंथो का अध्ययन विशेष है। आप  लगभग 20 वर्ष पूर्व हम  लोगो को छोड़कर परलोक को निकल गए। निम्न लिखित श्लोक जो आपके द्वारा ही बतलाये गये है,  वे यहाँ उधृत है ---- Guruji Sri Sri 108 pujyaniya get some content by ultimate. you were very efficient in the discourse of the Puranas. astrology also hired education. studying special books, you have a variety of nearly 20 years ago. we were the last people to leave out the following verses written by. were they here --          अश्व वाणी शुक्ल पक्षम प्रतिपदा मंद वासरे।            मध्य दिवसे अभिजिते जन्मावित जनार्दनह।।              ययुर चन्द्रम त्वया वंश यया...

10 - वंश - परिचय

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वंश - परिचय  दतात्रेय दत्तात्रेय दत्तात्रेय शीघ्र कृपा करने वाले देव की साक्षात मूर्ति कहे जाते हैं। अत्रि ऋषि की पत्नि माता अनुसूया पर प्रसन्न होकर तीनों देवों- ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने उन्हें वरदान दिया।ब्रह्मा के अंश से चंद्रमा, शंकर के अंश से दुर्वासा तथा विष्णु के अंश से दत्तात्रेय का जन्म हुआ। इन्हीं के आविर्भाव की तिथि ' दत्तात्रेय जयंती' कहलाती है। परम भक्त वत्सल दत्तात्रेय, भक्त के स्मरण करते ही उसके पास पहुँच जाते हैं। इसीलिए इन्हें 'स्मृतिगामी' तथा 'स्मृतिमात्रानुगन्ता' भी कहा गया है।ये विद्या के परम आचार्य हैं। भगवान दत्तजी के नाम पर 'दत्त संप्रदाय' दक्षिण भारत में विशेष प्रसिद्ध है। अन्य तथ्य एक बार वैदिक कर्मों का, धर्म का तथा वर्ण व्यवस्था का लोप हो गया था। उस समय दत्तात्रेय ने इन सबका पुनरूद्धार किया था।  हैहयराज अर्जुन ने अपनी सेवाओं से उन्हें प्रसन्न करके चार वर प्राप्त किये थे 1.बलवान, सत्यवादी, मनस्वी, अदोषदर्शी तथा सहस्त्र भुजाओं वाला बनने का। 2.जरायुज तथा अंडज जीवों के साथ-साथ समस्त चराचर जगत का शासन करने के सा...